वरिष्ठ पत्रकार शंकर पांडेय

तीन खबरें अभी भारत में टीवी न्यूज चैनलों पर छा गई है, ऐसा लग रहा है मानों अच्छे दिन आ रहे हैं। भारत में पिछले कुछ दिनों से राफेल आने की चर्चा थी फिर 5 राफेल भारत की सरजमीन पर उतर गये और उसकी खूबियों की जमकर चर्चा हो रही है… अब भारत की आसमानी ताकत बढ़ गई है, चीनी चिंतित हैं, पाकिस्तानी भयाक्रांत है, गूगल में लगातार राफेल की जानकारी एकत्रित करने की पड़ोसी राज्यों में धूम मच गई है…. वहीं, दूसरी खबर चर्चा में है कि भारत के करोड़ों हिन्दुओं की आस्था के प्रतीक भगवान श्रीराम का मंदिर बनाने 5 अगस्त को अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भूमिपूजन करने वाले हैं.. मंदिर कितना भव्य होगा… कितने तल होंगे… रामलला की पोशाक क्या होगी, मंदिर की नींव पर क्या क्या डाला जाएगा… किन किन नदियों तथा किन स्थानों की मिट्टी वहां डाली जाएगी… कब तक मंदिर बनेगा… क्या 5 अगस्त का मुहूर्त ठीक है या नहीं… वहीं तीसरी खबर चर्चा में है कि फिल्म तथा टीवी कलाकार सुशांत राजपूत की मौत में क्या उसकी प्रेमिका रिया चक्रवर्ती का हाथ है… सुशांत के पिता ने पटना के एक थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है, जुर्म कायम हो गया है, मुंबई की पुलिस भी पूछताछ करेगी आदि… आदि…।
अधिकांश बड़े टीवी न्यूज चैनलों में कोविड-19 की खबर दिखाना अब महज औपचारिकता बन गई है कितने कोरोना के पाजीटिव्ह मरीज कहां पाये जा रहे हैं… कितनों की मौत हो चुकी है, कौन व्ही.व्ही.आई पी पाजीटिव्ह पाया गया है बस इतिश्री?

इकोनामिक्स टाईम्स की रिपोर्ट के अनुसार 10 करोड़ लगभग के लोग ….

बेरोजगारी की कगार पर है… लघु, मध्यम वर्ग उद्योग व्यवसायिक संघ के सर्वे के मुताबिक कोरोना के चलते 2 से 5 करोड़ लोगों की नौकरी चली गई है… अगस्त तक करीब 1.5 करोड़ लोगों के और बेरोजगार होने की संभावना है… । काम के नये अवसर की बात तो दूर अब तो जिनके रोजगार थे वे भी छीने जा रहे हैं… कोरोना के चलते अस्पतालों में मरीज शैयाओं (बिस्तरों) की कमी पड़ती जा रही है, कोरोना की जांच बढ़ाना कठिन हो गया है, कई प्रदेशों के बड़े शहरों में फिर लॉकडाऊन की स्थिति है… रोज कमाकर खाने वालों की हालात क्या से क्या हो गई है… अपने प्रदेश लौटे अप्रवासी मजदूरों के घर काम के अभाव में चूल्हा नहीं जल रहा है… गांव के गांव काम तो करना चाहते हैं पर उन्हें पर्याप्त काम नहीं मिल रहा है। बच्चों की पढ़ाई का इस साल क्या होगा तय नहीं है? पर प्रधानमंत्री मन की बात करते हैं… दूसरों के मन में क्या है… यह तो उनसे उनकी पार्टी के बड़े नेता भी नहीं पूछ सकते हैं… 20 लाख करोड़ का पैकेज धरातल में कितना उतरा…? बैंकों से ऋण नहीं मिल रहा है बैंक वाले कहते हैं कि पहले से दिया गया ऋण ही वसूल नहीं हो रहा है तो क्या और ऋण देकर बैंकों को दिवालिया करना है क्या…। लगता है सत्ताधारी लोगों ने आम जनता को उनके हाल पर ही छोड़ दिया है..।

राफेल का छत्तीसगढिय़ा कनेक्शन..

राफेल की चर्चा ऐसे हो रही है जैसे अब 5 राफेल आने से भारत विश्वविजेता बन जाएगा? यह ठीक है कि हमारी सैन्य ताकत बढ़ी है पर इतना हो हल्ला को परमाणु विस्फोट करने के समय भी नहीं मचा था बहरहाल छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के दामाद विंग कमांडर मनीष शुक्ला भी उन लोगों में शामिल है जिन्होंने फ्रांस जाकर राफेल की ट्रेनिंग ली है। वैसे मनीष ने ‘सुखोईÓ का भी बकायदा प्रशिक्षण लिया है, पुणे तथा बरेली में सुखोई के लिए भी उन्होंने लंबे समय तक काम किया है। भारत के पूर्व राष्ट्रपति तथा मिसाईल मैन ए.पी.जे. कलाम ने जब सुखोई विमान उड़ाया था तब उनका ड्रेसअप तथा सुखोई के संबंध में जानकारी देने में मनीष ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी और जब पुलवामा हमला हुआ था तब भी मनीष जम्मू कश्मीर में अवंतिपुरा में ही सीईओ थे वहीं, उन्हें कमांडेशन अवार्ड भी मिला था। बहरहाल अब विंग कमांडर के रूप में वे नये पायलेटों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। वैसे कारगिल विजय से भी मनीष का कनेक्शन है… रायपुर में यूनियन बैंक से सेवानिवृत्त हुए अधिकारी आर.पी. तिवारी की बेटी अन्नू का विवाह इंडियन फोर्स के इस जांबाज अफसर से 21 साल पहले तय हुआ था उस समय मनीष एयरफोर्स के ट्रांसपोर्ट विभाग में कार्यरत थे, 29 जून 1999 को विवाह तय था तभी कारगिल युद्ध शुरू हो गया, अवकाश रद्द हो गया किसी तरह चंद दिनों की छुट्टी पर सीधे दिल्ली से रायपुर आये परिवार वाले राजस्थान से आये, फिर दूल्हा विवाह के बाद सीधे दिल्ली काम पर चले गये और बेटी ससुराल वालों के साथ गई जब कारगिल वार समाप्त हुआ तब दामाद मुंबई पहुंचे और वहीं तब प्रीतिभोज हुआ खैर मनीष कभी कभार ही रायपुर आते हैं। वैसे फौजी दामाद का एक ही तकिया कलाम है। जिंदगी जिंदादिली का नाम है, मुर्दादिल क्या खाक जिया करते हैं… वैसे खेल, योगा के शौकीन मनीष को लिखने-पढऩे का भी बड़ा शौक है…।

26 में एमएलए 62 में गर्वनर….

छिंदवाड़ा म.प्र. के रोहनकला गांव में 10 अप्रैल 1957 में जन्मी एक आदिवासी समुदाय की महिला 26 साल में विधायक बनी फिर अविभाजित म.प्र. में राज्य मंत्री बनी राज्यसभा सदस्य अनुसूचित जनजाति आयोग की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनकर मात्र 62 साल की उम्र में छत्तीसगढ़ जैसे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र (करीब 32 प्रतिशत आबादी) की राज्यपाल बनकर सुश्री अनुसूइया उइके ने 29 जुलाई 20 को अपने कार्यकाल का एक साल पूरा कर लिया है। छिंदवाड़ा जिले के दमुआ से विधायक चुनी जाने वाली अनुसुईया उइके पहले जिस तामिया महाविद्यालय की छात्रसंघ पदाधिकारी रही तो वहीं बाद में अर्थशास्त्र की व्याख्याता भी रही हैं। वे अपने क्षेत्र में ‘लूना वाली दीदी’ के नाम से चर्चित थी। तब उनके पास लूना हुआ करती थी और वे उसी में प्रार्थियों को लेजाकर उनके कार्य कराती थी। वैसे पहले माना जाता था कि राज्यपाल ‘लाट साहब’ होते हैं उनके पास जनसामान्य की पहुंच कम होती है पर यह भ्रम तोड़कर सुश्री उइके ने राजभवन के दरवाजे आम लोगों के लिए खोल दिये हैं, लोग अपनी समस्या बताते हैं और उसका त्वरित निदान भी उन्हें मिलता है, राज्यपाल बड़े अधिकारियों नहीं सीधे जिला कलेक्टर या एसपी से भी बात करने से परहेज नहीं करती है, उनका बस एक ही उसूल है उनके पास जो आये उसे पूरा न्याय भी मिले…।

सुपेबेड़ा स्वास्थ्य की समस्या हो या प्रदेश के सबसे बड़े मेकाहारा हास्पिटल का इलाज का मसला हो, नक्सल क्षेत्र में आवास की समस्या हो या विकास की बात हो, कोण्डागांव के अमलीपदर में कालीमिर्च की ग्रामीणों द्वारा उत्पादन करने पर आ रही समस्या को लेकर उस गांव को गोद लेने की घोषणा की बात हो, किसी के इलाज के लिए फौरी आर्थिक मदद के लिए वे तैयार रहती है एक सजायाफ्ता के परिजनों की गुहार पर वे मानवता का परिचय देकर सजा माफ भी कर चुकी हैं। आत्मसमर्पित नक्सलियों को पक्का मकान दिलाने उन्होंने पहल शुरू की तो छात्र समस्याओं/शिक्षा में सुधार को लेकर कुलपतियों को कड़े निर्देश देने में भी वे अव्वल रही।
छग की भूपेश सरकार से भी उनके संबंध अन्य प्रदेशों के राज्यपालों की तुलना में अच्छे हैं। बस पत्रकारिता विश्वविद्यालय कुलपति बलदेव भाई शर्मा तथा बिलासपुर स्थित पं. सुदरलाल शर्मा विवि में वंशगोपाल सिंह की बतौर कुलपति पुनर्नियुक्ति से राजभवन तथा सरकार के बीच कुछ तनाव दिखाई दिया था वहीं, शिक्षा विभाग से संबंधित 5 विधेयकों को राज्यपाल द्वारा रोकने तथा 3-4 मंत्रियों द्वारा उसे पारित करने के अनुरोध पर भी कुछ चर्चा शुरू हुई थी पर राज्यपाल का मत है कि कुलाधिपति होने के नाते राज्यपालों कुछ अधिकार मिले है, इस संबंध में यूजीसी की गाईड लाईन भी है। विश्वविद्यालयों की स्वायत्ता बनाये रखने की भी हमारी जिम्मेदारी है। इन विधेयकों के जरिये कुलाधिपतियों के अधिकारों में परिवर्तन की पेशकश की गई है ऐसे मामले में मानव संसाधन मंत्रालय तथा यूजीसी की राय लेकर निर्णय लूंगी।

बहरहाल छग आदिवासी बाहुल्य है या पिछड़ी जाति बाहुल्य क्षेत्र है इसको लेकर विवाद होता है। पर यह राहत की बात है कि राज्यपाल आदिवासी वर्ग से हैं तो मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग से है ऐसे में भी छग का विकास ठीक ठाक नहीं हो सका तो फिर कब होगा?

दाऊ जी राहुल शर्मा को भी इंसाफ दिलाओगे क्या?

छत्तीसगढ़ के संवेदनशील मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी सरकार बनते ही झीरमघाटी नक्सली वारदात की जांच के लिए एसआईटी गठित की वहीं, राजनांदगांव जिले के मदनवाड़ा क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ में मारे गये एसपी विनोद चौबे के मामले में भी एसआईटी जांच के निर्देश दिये हैं। अब उनसे बिलासपुर में आठ साल पहले बतौर पुलिस अधीक्षक राहुल शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले की भी जांच के लिए एसआईटी गठन की मांग पुन: उठ रही है। इस मामले में सीबीआई ने जांच की है तथा उस समय वहां तैनात एक अफसर की विभागीय जांच की भी सलाह दी थी पर अभी तक पुर्ववर्ती भाजपा शासनकाल में विभागीय जांच भी नहीं हुई। जाहिर है उक्त अधिकारी यदि केंद्र में चले गये तो उनकी पदोन्नति खतरे में पड़ जाएगी। कहा जाता है कि मृतक राहुल शर्मा ने भी अपने वरिष्ठ अधिकारी पर प्रताडऩा का आरोप लगाया था। वहीं कांग्रेस की एक वरिष्ठ नेत्री डॉ. चयनिका उन्नयाल पंडा में भी राहुल तथा उनके परिजनों को न्याय दिलाने एसआईटी गठन की मांग मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से की थी। दाऊ जी क्या आप राहुल शर्मा और उनके परिवार को न्याय दिलाने एसआईटी का गठन करेंगे?

और अब बस….

0 डॉ. रमन सिंह की सरकार के समय प्रदेश में 46 बाघ थे, भूपेश सरकार में हुई गणना में 27 बाघ कम मिले हैं… आखिर कहां गये बाघ?
0 निगम/मंडल की एक सूची फिर आने वाली है देखना है कि किसे स्थान मिलता है।
0 भारत में जिस तरह से राफेल की चर्चा है उससे फ्रांस कहीं पछता तो नहीं रहा है कि बहुत सस्ते में उसने बेच दिया राफेल…।
0 कुख्यात तस्कर विरप्पन की बेटी भाजपा की सदस्यता ग्रहण करते हुए कहा मुझे मोदी जी में अपने पिता की छवि दिखाई देती है।
0 कुछ पुलिस कप्तान 4-5 के बदले जाने की फिर चर्चा तेज है इसमें दंतेवाड़ा एसपी का नाम भी शामिल है।