केंद्र के कृषि कानून के विरोध में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा लाए जा रहे नए कानून का मसौदा कल विधानसभा पेश किया जाएगा। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि छत्तीसगढ़ सरकार सीधे नया कानून बनाने के बजाय राज्य के ही मंडी अधिनियम में संशोधन करने जा रही है। इससे राज्य के अधिकारियों को मंडी का नियंत्रण करने का अधिकार मिल जाएगा। अगर केंद्रीय कानून के तहत नई निजी मंडियां खुल गईं तो उनका नियंत्रण करने के लिए राज्य सरकार उनको डिम्ड मंडी घोषित कर देगी। डिम्ड यानी राज्य की मंडियों के समान ही उनका भी संचालन किया जा सकेगा। अगर राज्य के नियमों का उल्लंघन हुआ तो उसके तहत कार्रवाई भी की जा सकेगी। केंद्रीय कानून के इस प्रावधान का देशभर में विरोध हो रहा है। इस कारण केंद्रीय कानून के प्रावधानों के बीच ही यह रास्ता निकाला जा रहा है।
इसी प्रकार केंद्रीय कानून में आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत लिमिट की सीमा को खत्म करने की बात कर रही है। लेकिन राज्य सरकार अपने अधिनियम में संशोधन कर नई धाराएं जोड़ रही है। ताकि भंडारण और कारोबार के संचालन के लिए एक नियम हो। इसके तहत राज्य के अधिकारियों को यह अधिकार मिल जाएगा कि किसी तरह की गलत जानकारी पर संबंधित संस्थान या व्यापारियों पर कार्रवाई की जा सके। इन दोनों प्रावधानों से राज्य सरकार यह राजनीतिक संदेश देने का प्रयास करेगी कि केंद्रीय कानून केवल व्यापार और अर्थशास्त्र को ध्यान में रखकर बनाया गया है। दूसरी ओर राज्य सरकार ने किसानों के हित में अपने नियम बनाकर उनके हित में प्रावधान किया है। चूंकि केंद्र के कानून में संशोधन राज्य में संभव नहीं है और सीधे केंद्रीय कानून को नियमत: खारिज करना भी राज्य के बस में नहीं है इसलिए भूपेश सरकार ने ऐसा रास्ता निकाला है कि केंद्रीय कानून राज्य में संवैधानिक ढंग से लागू भी हो जाए और राजनीतिक रुप से जिन बातों का पूरे देश में विरोध हो रहा है, उसके अमल पर रोक भी लग जाए। इसी बात को ध्यान में रखते हुए विधानसभा में राज्य के मंडी अधिनियम में संशोधन का बिल पेश किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार ने तीन कृषि कानूून देशभर में लागू किया है। इनमें पहला कृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण) विधेयक 2020, दूसरा कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 तथा तीसरा आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक -2020 है। इन कानून का विरोध करने वालों का तर्क है कि इन कृषि कानून के लागू होने से किसानों की स्वायतत्ता खत्म हो जाएगी तथा किसानों को उनके उत्पादों का उचित दाम नहीं मिलेगा और किसानों का शोषण बढ़ेगा। कृषि मंत्री रविंद्र चौबे का कहना है कि केन्द्रीय कानून के आपत्तिजनक प्रावधानों से यहां के किसानों को किस तरह बचा सकते हैं, इसके लिए मंडी विधेयक में बदलाव कर रहे हैं।

एमएसपी पर फैसला शीत सत्र में संभव
पंजाब की तरह छत्तीसगढ़ सरकार अभी एमएसपी से कम खरीदी पर दंड का प्रावधान नहीं करने वाली है। यहां पंजाब से अलग परिस्थिति है। यहां राज्य सरकार एफसीआई के लिए खरीदी करती है इस कारण एमएसपी वाले प्रावधान को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। संकेत हैं कि इस पर विधानसभा के शीत सत्र में कानून में संशोधन कर नया प्रावधान लाएगी।