लोरमी 14 जनवरी, 2020। जनता कांग्रेस जोगी के लोरमी ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राकेश छाबड़ा के  गुंडागर्दी का मामला सामने आया है। राकेश छावड़ा ने न केवल डीएवी स्कूल के स्पोर्ट टीचर लक्ष्मी कांत साहू के साथ न सिर्फ गालीगलौज की है, बल्कि स्कूल में घुसकर मारपीट भी की है। इस संबंध में थाने में शिकायत  के बाद एफआईआर दर्ज तो कर लिया गया था। लेकिन अभी तक आरोपी राकेश छाबड़ा की गिरफ्तारी नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि इस मामले में आरोपी को जेसीसी के क्षेत्रीय विधायक एवं संबंधित पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सहित बड़े नेताओं का संरक्षण होना बताया जा रहा है इन्ही लोगों के दबाव में संबंधित थाने द्वारा अब तक गिरफ्तारी नहीं की गई है बल्कि उल्टा लक्षमीकांत साहू को एवं स्कूल प्रबंधन को मामला वापस लेने के लिए दबाव डाला जा रहा है। इस मामले में अब साहू समाज भी पीड़ित लक्ष्मीकांत साहू के लिए सामने आ गया है।

छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ युवा प्रकोष्ठ के महामंत्री योगेश साहू और रायपुर संभाग युवा प्रकोष्ठ के संभाग अध्यक्ष प्यारे लाल साहू ने जेसीसीजे के बड़े नेताओं को चेतावनी दी गई है कि अगर आरोपी को संबंधित थाने में मंगलवार 4 बजे तक सरेंडर नहीं कराया जाता है तो आरोपी को संरक्षण देने वाले जेसीसीजे के क्षेत्रीय विधायक एवं प्रदेश अध्यक्ष के विरोध में आज शाम को 6 बजे बुढ़ापारा तालाब धरना स्थल के पास पुतला दहन किया जाएगा। इसके साथ ही चेतावनी दी है कि अगर सरेंडर नहीं किया गया तो जेसीसीजे के नेताओं के खिलाफ उग्र आंदोलन करेंगे।

यह पूरा मामला जिले के लोरमी इलाके के कोतरी स्थित डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल का है जहां पदस्थ स्पोर्ट टीचर लक्ष्मीकांत साहू ने लोरमी छजका पार्टी के ब्लॉक अध्यक्ष राकेश छावड़ा के खिलाफ थाने में शिकायत की थी कि उसने शुक्रवार दोपहर करीब ढाई बजे अपने एक साथी के साथ स्कूल पहुंचकर स्कूल में ही पढ़ रहे अपने बेटे के साथ कबड्डी खेल के दौरान चोट लगने की बात कहते हुए पहले तो गंदी गालियां दी उसके बाद फिर उसके साथ मारपीट करते हुए जान से मारने की धमकी दी।

लक्ष्मीकांत ने अपनी शिकायत में कहा है कि राकेश छावड़ा स्कूल के प्रिंसिपल पर भी उन्हें स्कूल से हटवाने के लिए न सिर्फ दबाव बनाया बल्कि धमकी भी दी है कि अगर उसे स्कूल से नहीं हटाया गया तो हर रोज स्कूल में आकर गुंडागर्दी करेगा. इस घटना के बाद से शिक्षक डरा-सहमा है। बहरहाल अब देखने वाली बात यह होगी कि समाज के दबाव के बाद आरोपी थाने में सरेंडर करते है कि नहीं।