दुर्ग। बैंक द्वारा प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा (पीएमजेजेबी) योजना के अंतर्गत 330 रुपये का वार्षिक प्रीमियम गलत नाम पर कटौती किया गया, जिसके कारण मृतक महिला के बेटे को बीमा दावा राशि नहीं मिली, इसे उपभोक्ता के प्रति सेवा में निम्नतापूर्ण आचरण मानते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और पिनकापार (डौंडीलोहारा) ब्रांच मैनेजर पर 216000 रुपये हर्जाना लगाया।

ग्राहक की शिकायत

परिवाद के मुताबिक ग्राम पिनकापार तहसील डौंडीलोहारा जिला बालोद निवासी परिवादी सतीश कुमार सारथीे के पिता घनश्याम सारथी और माता द्रोपति बाई का संयुक्त बचत खाता जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की पिनकापार शाखा में था। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा (PMJJB) योजना के लिए द्वितीय खाताधारक द्रोपति बाई ने दिनांक 27 मई 2015 को अभिदाता पंजीकरण फार्म भरकर सहमति दी थी जिसके लिए बैंक ने 330 रुपये प्रीमियम काटकर द्रोपति बाई का 31 मई 2016 तक के लिए बीमा किया लेकिन ठीक अगले वर्ष 2016-17 के लिए प्रीमियम काटते समय द्वितीय खाताधारक द्रोपती बाई की बजाय प्रथम खाताधारक घनश्याम के नाम से बीमा काटा और इसी दौरान द्रोपती बाई की दिनांक 31 जुलाई 2017 को मृत्यु हो गई जिसके बाद मृत्यु दावा पेश करने पर बीमा कंपनी एलआईसी ने द्रोपती बाई का बीमा प्रभावी नहीं है, यह कहकर दावा भुगतान नहीं किया।

अनावेदकगण का बचाव

बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम ने बचाव में कहा कि संबंधित बैंक ने बीमित सदस्य के रूप में घनश्याम का नाम सूची में लिखकर आधार कार्ड नंबर सहित भेजा गया था इसीलिए घनश्याम ही बीमित सदस्य है जो कि जीवित है। द्रोपती बाई के संबंध में बीमा प्रभावी नहीं था इसीलिए बीमा कंपनी देनदार नहीं है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक ने बचाव में तर्क दिया कि बीमा कंपनी से हुए समझौते के तहत उसने कार्य का निष्पादन किया है।

फोरम का फैसला

जिला उपभोक्ता फोरम के सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व श्रीमती लता चंद्राकर ने प्रकरण में प्रस्तुत साक्ष्य एवं दस्तावेजों की विवेचना से यह निष्कर्ष निकाला कि पीएमजेजेबीवाय (PMJJBY) की नियमावली तहत प्रीमियम कटौती के लिए द्वितीय खाताधारक द्रोपति बाई ने अभिदाता पंजीकरण प्रपत्र भरकर दिया था, ऐसे में प्रथम वर्ष के बाद दूसरे वर्ष में भी मृतका द्रोपती बाई के संबंध में ही बीमा कटौती की जानी थी जबकि बैंक ने द्रोपती बाई की जगह प्रथम खाताधारक के नाम पर अनाधिकृत रुप से प्रीमियम कटौती की और अपनी इस चूक को बैंक ने बीमा कंपनी को लिखे गए पत्र में भी स्वीकार किया है। बैंक की दोषपूर्ण कार्यशैली और लापरवाही के चलते ही मृतका खाताधारक बीमा से कवर्ड नहीं हो पाई, यदि बैंक ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन उचित प्रकार से करते हुए मृतका का बीमा प्रीमियम काटा होता तो वह बीमित श्रेणी में शामिल होती लेकिन अनावेदक बैंक की चूक का खामियाजा परिवादी नहीं भुगतेगा बल्कि उसकी भरपाई बैंक को ही करनी होगी और मृतका को बीमित ही माना जाएगा जिसके चलते अब पीएमजेजेबी योजना के तहत दी जाने वाली बीमा राशि 2 लाख रुपये परिवादी को भुगतान करने का उत्तरदायित्व बैंक का है। फोरम ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के मुख्य कार्यालय और पिनकापार शाखा को सेवा में निम्नता का जिम्मेदार माना साथ ही बीमा कंपनी को उन्मुक्त करते हुए उसके विरुद्ध प्रकरण खारिज कर दिया।

जिला उपभोक्ता फोरम के सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और पिनकापार शाखा प्रबंधक पर 2 लाख 16 हजार रुपये हर्जाना लगाया, जिसमें बीमा राशि 200000 रुपये मय ब्याज, मानसिक क्षतिपूर्ति स्वरूप 15000 रुपये तथा वाद व्यय 1000 रुपये देने का आदेश दिया गया।