नई दिल्‍ली। बिहार झारखंड और पूर्वांचल क्षेत्र में प्रमुख रुप से मनाए जाने वाला महापर्व छठ (Chhath 2020) की बुधवार (18 नवंबर) से महापर्व छठ आरंभ हो रहा है। 18 नवंबर नहाय खाय से महापर्व छठ पूजा का आरंभ होगा जो कि 21 नवंबर को पारण के साथ संपन्‍न होगा। इस पर्व का हिंदू धर्म में बहुत विशेष महत्‍व है इस त्‍योहार को लेकर लोगों की गहरी आस्‍था जुड़ी हुई है। बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में विशेष रुप से मनाए जाने वाले इस छठ पर्व पर भगवान सूर्य, छठी मईया की पूजा की जाती है।

देश के अन्‍य राज्‍यों में और विदेशों में इन प्रदेशों के रहने वाले लोग ये दिवाली के छह दिन बाद छठ मनाते हैं। यहीं वजह है कि अब छठ सिर्फ कुछ राज्य तक ही सीमित नहीं रह गया है। छठ को महापर्व इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये पूरे 4 दिन मनाया जाता है और छठ का पूजा नदी, तालाब या पोखर किनारे घाट सजाकर ही मनाया जाता है परंतु इस बार कोरोना महामारी के चलते देश की राजधानी दिल्‍ली समेत कुछ ऐसे राज्‍य हैं जहां छठ पर्व पर सार्वजनिक स्‍थान पर जाकर पूजा करने पर बैन लगा दिया गया है। आइए जानते हैं कौन से वो प्रदेश हैं जहां लगाया गया है प्रतिबंध?


दिल्ली सरकार के अनुसार दिल्‍ली में कोरोना कह तीसरी लहर सीमा के पार पहुंच चुकी हैं यहीं कारण हे कि इस वर्ष छठ पूजा का आयोजन सार्वजनिक स्थलों पर करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि सरकार न श्रद्धालुओं को अपने-अपने घरों में या किसी निजी स्थल पर छठ पर्व मनाने की छूट दी है। छठ पर्व के लिए कोविड-19 दिशानिर्देशों का पालन करना जरूरी होगा। दिल्ली में किसी भी सार्वजनिक स्थल, सार्वजनिक ग्राउंड, घाट और मन्दिर में नवम्बर के महीने में छठ पूजा का आयोजन नहीं होगा। सभी जिलों के डीएम और डीसीपी को आदेश का पालन सुनिश्चित कराने को कहा गया है। DDMA द्वारा इससे संबंधित आदेश जारी किया गया है। दिल्‍ली सरकार के इस आदेश के विरोध में मंगलवार को भाजपा के पूर्वांचल मोर्चा के सदस्‍यों ने दिल्‍ली सीएम अरविंद केजरीवाल के आवास के बाहर विरोध मार्च भी निकाला।

झारखंड में भी छठ पूजा पर लगाया गया प्रतिबंध
झारखंड सरकार ने छठ पूजा को सार्वजनिक स्थानों पर आयोजित करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार ने दिशानिर्देश जारी कर श्रद्धालुओं को नदियों, तालाबों, झीलों और अन्य जल निकायों में छठ पूजा नहीं करने का निर्देश दिया है। गृह, कारागार और आपदा प्रबंधन विभाग के दिशानिर्देशों ने तालाबों और नदियों के किनारे स्टॉल या बैरिकेड्स लगाने पर भी प्रतिबंध लगा दिए हैं और साथ ही छठ घाटों पर किसी भी तरह की सजावट पर प्रतिबंध लगाया है यहां तक कि कोरोना फैलने से रोकने के उपायों के तहत सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे फोड़ने, सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर भी रोक लगा दी है।

ओडिशा में लगाया है प्रतिबंध
ओडिशा में भी बिहार और यूपी के लोग काफी अधिक संख्‍या में बसे हुए हैं लेकिन ओडिशा सरकार ने सोमवार को सार्वजनिक स्थानों पर छठ पूजा आयोजित करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। 20 और 21 नवंबर को नदी तट पर स्नान करने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। ओडिशा सरकार ने ये प्रतिबंध इसलिए लगाया है क्योंकि घाट पर लोग एकत्र होते हैं तो भीड़ में कोरोना का संक्रमण अधिक फैलने का खतरा उत्‍पन्‍न होगा। इतना ही नहीं सरकार की चेतावनी है कि इस आदेश का उल्लंघन करने वाला कोई भी व्यक्ति 2005 के आपदा प्रबंधन अधिनियम और अन्य संबंधित कानूनों के तहत सजा दी जाएगी।

पश्चिम बंगाल में कोर्ट ने दिया ये आदेश
पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्‍या में बिहारी बसे हैं लेकिन कोरोना महामारी के चलते छठ पूजा के जुलूस पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने प्रतिबंध लगाया है। इसके साथ ही छठ पूजा को मनाने के नियम भी तय किए हैं। कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक, एक परिवार में केवल दो सदस्यों को छठ पूजा करने के लिए नदी या तालाब के जल में प्रवेश करने की अनुमति होगी। कोलकाता की दो सबसे बड़ी नदी, सुभाष सरोवर और रबींद्र सरोवर में आम लोगों का प्रवेश रोक दिया गया है लेकिन कोविड प्रोटोकाल का सख्‍ती से पालन करना होगा।

बिहार में छठपूजा को लेकर जारी की गई ये गाइडलाइन
बिहार सरकार के गृह विभाग ने छठ पर्व के मद्देनजर कोरोना गाइडलाइन जारी की है। इसके अनुसार 60 साल से अधिक व 10 साल से कम उम्र के लोगों को नदी घाटों पर जाने की अनुमति नहीं दी गई है। साथ ही अर्घ्‍य (Arghya) के दौरान नदी में डुबकी लगाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। अगर किसी को बुखार है तो घाट पर नहीं जाने की सलाह दी गई है। साथ ही कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए घर पर ही छठ मनाने की सलाह दी गई है।