रायपुर। कवर्धा जिले के आदिवासी की मौत के मामले में मानवधिकार आयोग ने संज्ञान में लिया है। छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की सीमा पर नक्सली मुठभेड़ के नाम पर आदिवासी की मौत का मामला गरमाते जा रहा है। ताजा घटनाक्रम में बालाघाट पुलिस ने मामले में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धारा 302 के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं बालाघाट कलेक्टर ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं।

नक्सली मुठभेड़ के नाम पर नदी में मछली मारने गए कवर्धा जिले के आदिवासी झामसिंग धुर्वे को गोलियों से छलनी करने के मामले में छत्तीसगढ़ सरकार ने गंभीरता दिखाई है। स्थानीय विधायक और वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने जहां मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, वहीं राज्यपाल अनुसुईया उइके ने भी मध्यप्रदेश के राज्यपाल से चर्चा की है।

मामले में निशाने पर आई बालाघाट पुलिस ने आदिवासी झामसिंह के मौत के मामले में अज्ञात आरोपी के खिलाफ धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया है। इस बात की जानकारी देते हुए बालाघाट पुलिस अधीक्षक अभिषेक तिवारी ने बताया कि नक्सली व पुलिस के बीच मुठभेड़ के दौरान एक आदिवासी की मौत हुई है। इसमें पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धारा 302 का प्रकरण दर्ज कर जांच शुरूं कर दी है।

इसके अलावा मानवाधिकार आयोग ने भी इस मामले में मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस नरेन्द्र कुमार जैन ने मध्यप्रदेश के डीजीपी, आईजी जबलपुर और बालाघाट एसपी को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह के अंदर इस मामले में विस्तृत प्रतिवेदन मांगा है। इधर घटना पर चढ़ रहे सियासी रंग के बीच मध्यप्रदेश सरकार ने फौरी तार पर मृतक के परिजनों को एक लाख रुपए की सहायता राशि का चेक प्रदान किया है।