21, नवंबर 2020 नई दिल्ली। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय और प्रमुख निजी क्षेत्र की ऊर्जा कंपनियों और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के बीच सीबीजी के लिए ‘सतत’ (सस्टेनेबल अल्टरनेटिव टूवर्ड्स अफोर्डेबल ट्रांसपोर्टेशन) पहल के तहत देशभर में 900 कम्प्रेस्ड बायो-गैस प्लांट स्थापित करने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर हुए हैं।

जानकारी के मुताबिक पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जेबीएम ग्रुप, अडानी गैस, पेट्रोनेट एनएलजी आदि कंपनियों के साथ शुक्रवार को एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं।

मंत्रालय की ओर से ये कदम जैव और फसल अवशेषों से तैयार होने वाले इस ईंधन के क्षेत्र में अपार संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। इस दौरान केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि हम टिकाऊ, सस्ते और स्वच्छ ईंधन की निरंतर खोज की दिशा में एक नया अध्याय लिख रहे हैं।

एसएटीएटी के लिए एक रोडमैप भी तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि वह ये जानकर खुश हैं कि भारतीय उद्योग से जुडे़ लोगों ने सस्टेनेबल अल्टरनेटिव टूवर्ड्स अफोर्डेबल ट्रांसपोर्टेशन पहल में रुचि दिखाई है।

सीबीजी प्लांट की बात करें तो 600 के लिए आशय पत्र पहले ही दिए जा चुके हैं। वहीं 900 प्लांट स्थापित करने के लिए अब एमओयू पर हस्ताक्षर हो गए हैं। इसके हिसाब से अब कुल 1500 प्लांट पर काम हो रहा है।

आपको बता दें भारत सरकार ने साल 2018 में एसएटीएटी पहल की शुरुआत की थी। जिसका उद्देश्य परिवहन क्षेत्र में स्वच्छ ईंधन के उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ सीबीजी की उपलब्धता को बढ़ाना भी है। इस योजना के तहत साल 2023-2024 तक पांच हजार सीबीजी प्लांट स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इन एमओयू पर हस्ताक्षर होना सरकार की स्वच्छ ऊर्जा पहल ही ओर एक बड़ा कदम बताया जा रहा है।