रायपुर। जिला प्रशासन ने कोरोना संक्रमित मरीजों के घर के बाहर स्टीकर लगाना अनिवार्य कर दिया है। यहीं नहीं संक्रमितों के घर के बाहर लगे स्टीकर से छेड़छाड़ करने पर एपेडेमिक एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। रायपुर कलेक्टर डॉ एस भारती दासन ने कोरानो संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए शहर में किए जा रहे जोनवार कार्यों की समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिए हैं।

  • रायपुर कलेक्टर ने यह भी कहा है कि जिस क्षेत्र में अधिक कोरोना संक्रमित मरीजों की पहचान होती है वहां टेस्टिंग, काढ़ा कांट्रेक्टर टेसिंग तुरंत शुरू कराई जाए।
  • बैठक के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि जोन स्तर पर अधिक से अधिक परीक्षण किया जाय। जोनवार सैंपलिंग का लक्ष्य बनाकर कार्य करें, पॉजिटिव आए मरीजों के परिवहन के लिए तत्काल वाहन उपलब्ध कराया जाए।
  • सक्रिय मरीजों की संख्या को ध्यान में रखते हुए जरुरी व्यवस्था बनाया जाना है। बुजुर्ग, गर्भवती महिला और गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों की पूरी जानकारी रखा जाए। अन्य बीमारी के गंभीर मरीजों को चिकित्सा उपलब्ध कराना आवश्यक है।
  • सर्विलांस टीम को भी लोंगो के ऑक्सीजन लेवल और पल्स रेट का परीक्षण में आवश्यक रुप से करने को कहा है। कलेक्टर ने लोगों से भी अपील करते हुए कहा कि संक्रमण से बचने के लिए आवश्यक सावधानी बरतें।

क्या हैं एपेडेमिक एक्ट?

Epidemic Disease Act 1897: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 22 अप्रैल, 2020 को Epidemic Disease Act, 1897 में नए संशोधन का प्रस्ताव करते हुए एक अध्यादेश को मंजूरी दी है। नए संशोधनों में हेल्थकेयर वर्कर्स पर हमला करने का दोषी पाए जाने पर 6 महीने से लेकर 7 साल तक की कैद शामिल है। इसके अलावा हेल्थकेयर वर्कर्स पर हमले को गैर-जमानती अपराध भी घोषित कर दिया गया है।

एपीडेमिक डिजीज एक्ट, 1897 के बारे में(About Epidemic Disease Act, 1897)

इस एक्ट में कुल मिलाकर 4 सेक्शन हैं और संभवतः यह सबसे छोटा एक्ट है। इस एक्ट के सेक्शन 2 में इसे लागू करने के लिए कुछ शक्तियां राज्य और सेक्शन 2 (A) की शक्तियां केंद्र सरकार को किसी महामारी को दूर करने या कण्ट्रोल करने के लिए दी गयीं हैं।

एपीडेमिक डिजीज एक्ट, 1897 की धारा-2 में लिखा है,

जब राज्य सरकार को किसी समय ऐसा लगे कि उस राज्य के किसी भाग में किसी ख़तरनाक महामारी फ़ैल रही है या फ़ैलने की आशंका है, तब अगर राज्य सरकार ये समझती है कि उस समय मौजूद क़ानून इस महामारी को रोकने के लिए नाकाफ़ी हैं, तो राज्य सरकार कुछ उपाय कर सकती है। इन उपायों में लोगों को सार्वजनिक सूचना के जरिए रोग के प्रकोप या प्रसार की रोकथाम बताये जाते हैं।