नई दिल्ली। पीएम मोदी की कैबिनेट बैठक में आज चार बड़े फैसले लिए गए। इसमें से एक बड़ा फैसला कारोबारियों और कर्मचारियों के लिए रहा। उनके फायदे के लिए मोदी कैबिनेट ने 24 फीसदी ईपीएफ मदद जो अगस्त तक दी जा रही थी, उसे बढ़ाकर अब सितंबर तक कर दिया गया है। बुधवार को केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर व केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कैबिनेट के फैसलों के बारे में जानकारी दी।

  • बता दें कारोबारियों और कर्मचारियों को 24 फीसदी ईपीएफ सपोर्ट को मंजूरी से 3.67 लाख नियोक्ताओं और 72.22 लाख कर्मचारियों का राहत मिलेगी।
  • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के तहत जिन कंपनियों में 100 कर्मचारी तक मौजूद हैं और इनमें से 90 फीसदी कर्मचारी 15 हजार रुपये से कम महीने में कमाते हैं।
  • ऐसी कंपनियों और उनके कर्मचारियों की ओर से ईपीएफ में योगदान मार्च से लेकर अगस्त 2020 तक के लिए सरकार की ओर से दिया जा रहा है।
  • अब ईपीएफ में अंशदान में सरकारी भागीदारी भी सितंबर तक कर दिया गया है।
  • बता दें केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज के तहत ईपीएफ के लिए दी गई सहायता अगले तीन महीनों के लिए और बढ़ाया था, जो पहले मार्च, अप्रैल, मई तक दी गई थी।
  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि जून, जुलाई और अगस्त में भी 15 हजार से कम सैलरी वालों का ईपीएफ (यानी सैलरी का 24 फीसदी) सरकार जमा करेगी।
  • सरकार के इस ऐलान का फायदा सिर्फ उन्हीं कंपनियों को मिल रहा है, जिनके पास 100 से कम कर्मचारी हैं और 90 फीसदी कर्मचारी की सैलरी 15,000 रुपये से कम है। इससे कंपनी और कर्मचारी दोनों को फायदा हो रहा है।

जिनकी सैलरी 15000 ज्यादा उनका क्या?

सरकार ने ऐसे कर्मचारियों की टेक होम सैलरी बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है, जिनकी सैलरी 15 हजार से ज्यादा है, उनके मामले में नियोक्ता और कर्मचारी दोनों के लिए पीएफ में योगदान का प्रतिशत घटाकर 12 से 10 प्रतिशत किया गया है। इससे नियोक्ताओं के पास 6,750 करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी उपलब्ध होगी। ध्यान रहें कि केंद्रीय कर्मचारियों और सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) में के मामले में यह प्रावाधान नहीं होगा। उनके पीएफ अकाउंट में पहले की तरह ही 24% जाएगा, 12% नियोक्ता और 12% कर्मचारी का।